जब 41 पाकिस्तानी हिंदुओं को मिली भारत की नागरिकता, छलके खुशी के आंसू

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पिछले कई वर्षों से भारत में गुजर-बसर कर रहे सिंधी समाज के 41 पाकिस्तानी नागरिकों के लिए 11 दिसंबर का दिन बड़ी खुशी लेकर आया. दरअसल इन लोगों को काफी कोशिश के बाद भारत की नागरिकता मिली है.

पाकिस्तान में खराब होते माहौल के चलते ली भारत की नागरिकता

भारत की नागरिकता मिलने के बाद से ही उनके चेहरे पर खुशी देखने लायक थी. ये सभी लोग पिछले 14 साल से भारत की नागरिकता लेने का प्रयास कर रहे थे. इन लोगों का कहना है कि पाकिस्तान में माहौल लगातार खराब हो रहा है. साथ ही उनके परिवार के कई लोग भी भारत में विस्थापित हो चुके हैं.

सिंधी समाज के 91 लोगों ने किया था आवेदन

आपको बता दें कि पाकिस्तान के कुल 91 सिंधी समाज के लोगों ने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया था. जिस पर सोमवार को सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद एडीएम सिटी सुभाष चंद शर्मा द्वारा सभी लोगों को भारत के नागरिक की शपथ दिलाई गई. इस दौरान कुल 41 लोग जिनमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, उन्होंने भारत के नागरिक के कर्तव्यों की शपथ ली. 41 लोगों के अलावा बचे हुए 50 पाकिस्तानी लोगों के लिए भी भारत की नागरिकता ग्रहण करने की प्रक्रिया जारी है और उन्हें भी जल्द ही भारत देश की नागरिकता मिल जाएगी.

रिश्तेदारों संग भारत में रहने की खुशी

नागरिकता लेने वाले जयपाल ने बताया कि वे बलूचिस्तान पाकिस्तान के रहने वाले हैं. वे लोग पाकिस्तान की नागरिकता छोड़कर भारत की नागरिकता ले रहे हैं. जयपाल ने कहा कि हिंदुस्तान की नागरिकता मिलने पर उन्हें बेहद खुशी हो रही है. उनके बहुत सारे रिश्तेदार भारत में ही रहते हैं और अब वे भी उनके साथ रहेंगे.

नागरिकता लेने वाली कंचन ने कहा, ‘हमारा सब कुछ यहीं पर है. यहां की नागरिकता लेने के लिए जो भी प्रक्रिया थी वह अब जाकर पूरी हुई है. यहां के कलेक्टर ने अच्छा रिस्पॉन्स दिया, जिस वजह से सब काम हो गया. पाकिस्तान के हालात थोड़े खराब हैं. मैं पिछले 14 साल से यहां आने के लिए प्रयास कर रही थी.’

जिसके पिता को बेरहमी से मार डाला गया, उस बेटी का आक्रोश ख़ून जमा देता है

 

Rajsamand victim Muhamamd Afrazul’s family shattered after gruesome killing in the name of love jihad

नफरत की बलि चढ़े मुहम्मद अफराज़ुल की तस्वीर के साथ उसका परिवार.

अपनों की मौत अपने आप में दुनिया हिला देने वाला हादसा होती है. उस पर अगर मौत स्वाभाविक न होकर किसी हत्यारे की वहशियाना करतूत का नतीजा हो तो दर्द सीमा से परे चला जाता है. राजस्थान के राजसमंद में अंधी नफ़रत की बलि चढ़े मुहम्मद अफराज़ुल के परिवार का आक्रोश देखकर किसी भी संवेदनशील इंसान का कलेजा कांप जाएगा.

मुहम्मद अफराज़ुल की बीवी गुल बहार ने इंडियन एक्सप्रेस से फोन पर बातचीत की. वो कहती हैं ,

“जिन्होंने मेरे पति का बेरहमी से क़त्ल किया और उस घटना का वीडियो फैलाया उनका भी यही हश्र होना चाहिए. उन्हें फांसी पर टांग देना चाहिए. हमें इंसाफ चाहिए.”

आगे कहती हैं,

“हमें राजस्थान पुलिस का फोन आया कि उनकी हत्या हो गई है. एक झटके में मेरा परिवार तबाह हो गया.”

48 साल के मुहम्मद अफराज़ुल अपने घर के इकलौते कमाऊ मेंबर थे. पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के सैयादपुर गांव में सारा परिवार रहता है. अफराज़ुल इसी महीने गांव जाने वाले थे. उन्हें अपनी सबसे छोटी बेटी की शादी की तैयारियां करनी थी. पिछले 12 साल से वो राजस्थान में काम कर रहे थे. अभी दो महीने पहले ही घर होकर आए थे.

शंभू: मानसिक रोगी नहीं, कोल्ड ब्लडेड मर्डरर.

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अफराज़ुल की बेटी रेजिना खातून का आक्रोश बर्दाश्त से परे है. इंडियन एक्सप्रेस से वो कहती हैं,

“हमने उनसे मंगलवार को बात की थी आखिरी बार. वो हमें रोज़ फ़ोन करते थे. लव जिहाद क्या बला है हमें नहीं पता.”

आगे जो कहती है वो कलेजा हिला देगा.

“उन्होंने कसाई की तरह मेरे पिता को काट डाला, फिर आग के हवाले कर दिया. मैंने वीडियो देखा है और अपने असहाय बाप की चीखें सुनी हैं.”

पड़ोसी इब्राहिम शेख पूछते हैं कि अब उनके परिवार का क्या होगा! कमाई के इकलौते स्रोत को मार डाला गया है.

ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी हमारे मुल्क के लिए भयानक साबित होंगी. इस एक घटना ने पूरे मुल्क को हिलाकर रख दिया है. ये हत्या अपने आप में बड़ी ट्रेजेडी है ही, उससे ज़्यादा चिंताजनक वो आवाज़ें हैं जो इसे डिफेंड करती नज़र आ रही हैं. उस शख्स ने कैमरे पर ‘लव-जिहाद’ बोल दिया था. इतना काफी है लोगों को एक मर्डर डिफेंड करने के लिए. यकीन नहीं होता ये वही भारत देश है जहां दया, क्षमा, शांति की महत्ता सर्वोपरि हुआ करती थी.

मुहम्मद अफराज़ुल, घृणा के यज्ञ में एक और आहुति.

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इस देश का भला चाहने वाले तमाम लोग इस ख़ौफ़ से भर गए हैं कि उस शख्स की सी निष्ठुरता कहीं अक्सरियत का राष्ट्रीय चरित्र न बन जाए. यहां वहां शेयर हुए उस वीडियो के नीचे आए कमेंट्स, इस ख़ौफ़ के हवा-हवाई होने की संभावना को खारिज करते हैं. ख़ून देखकर खुश होने वाली भीड़ में इज़ाफ़ा ही होता जा रहा है. नहीं समझ में आ रहा कि इसको रोकने के लिए क्या कर सकते हैं.

जहां तक हो सके सबको इसकी मुखर मुख़ालफ़त करनी चाहिए. इफ, किंतु, परंतु, बट लगाए बिना. हैवानियत अपना-पराया नहीं पहचानती. एक बार लहू मुंह लगने की देर है, फिर कोई सुरक्षित नहीं. जो भी इस खूंरेज़ी का समर्थन करे, खुल के या दबी ज़ुबान में, उससे नाता तोड़ लिया जाए. मर्डर जस्टिफाई करने वाला आपका, मुल्क का, इंसानियत का, किसी का सगा नहीं हो सकता. लिहाज में ओढ़ी चुप्पी मुल्क की ऐसी-तैसी फेर देगी.

cre: thelallantop